शुक्रगुज़ारी

ज़िन्दगी की बहुत सी हकीक़तो में से एक है शुक्रगुज़ारी जिसके मायने होते है जो आपको मिला उस पर राज़ी रहना । इस बात से दुनिया के बहुत से अक्लमंद लोग इत्तेफाक नहीं रखते है और हो भी क्यों न ये मामला ज्ञान से बड़कर विश्वास का जो है । ये एक राज़ है जिसे दुनिया की एक बड़ी आबादी जानती नहीं है ।

आप इस बात को नहीं मानेगे लेकिन ये सच है । दुनिया में लोग वो ही करते है जो सफल लोग करते है लेकिन सफल लोग अपनी सफलता के असल फार्मूले को लोगो के बीच आम नहीं करते । ये इसलिए नहीं की वो छिपाना चाहते है बल्कि वो सिध्दांत लोगो को समझ नहीं आते या ये कहे की लोग उन सिध्दांतो पर यकीन नहीं करते ।

चलिए मै एक सवाल करता हु ,क्यों दुनिया की आबादी के एक फीसदी लोगो के पास दुनिया की सारी दौलत होती है ? क्यों दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मिडिल और पुअर क्लास में ज़िन्दगी गुज़ारता है ? क्या इतने सारे लोगो ने अमीर बनने के लिए कुछ भी नहीं किया होगा ? ऐसा कहना सरासर गलत होगा कुछ से ज़्यादा किया मगर गलत तरीके से किया  ।

चलिए मै आपको बताता हु । कुदरत के अपने कानून होते है जिस पर सारी दुनिया कायम है उन्ही में से एक सिध्दांत जिसे क़ुरान और बाइबल में तक़रीबन एक जैसे वाक्यों में लिखा मिलता है । क़ुरान में आता है :

और जब तुम्हारे रब ने तुमको आगाह कर दिया कि अगर तुम शुक्र करोगे तो मै तुमको ज़्यादा दूंगा और अगर तुम नाशुक्री करोगे तो मेरा अज़ाब बड़ा सख्त है । (14:7)

ये वो सिध्दांत है जो आपको ये बताता है की जो भी चीज़े आपके पास है पहले उनकी कद्र करे उन्हें अहमियत दे हालाँकि ज़्यादातर लोग ऐसा नहीं सोचते और न ही करते है । जो नहीं है उनकी फ़िक्र करते रहते है और परेशान रहते है और जो अभी है उसे भी खो देते है । इसके सीधे मायने ये ही है की आपको अपनी वर्तमान परिस्थिति को स्वीकार करना होगा, यदि आपका बॉस आपको परेशान करता है या आपकी बीवी की कोई बुरी आदत आपको पसंद नहीं है या आपके बच्चे आपका कहना नहीं मानते या आपके बिजनेस में आपको नुकसान हुआ है तो उस परिस्थिति को स्वीकार करे ।

हाँ मेरे जीवन में ऐसा हो रहा है मुझे उन हालात या बिगड़े रिश्ते को लेकर गाली गलौज, चिढ़ना या परेशान नहीं होना है । सहज तौर पर उन सभी लोगो को या हालात को कुबूल करना है । फिर आप अपने मन में एक अजब सी शांति महसूस करेंगे । आप पाएंगे की कुछ बदल रहा है , ये बदलाव बाहरी नहीं बल्कि आतंरिक है । चीजों के देखने के तरीके बदलने होंगे ।

जब कोई बेवजह झगड़े करता है तो आप उसे समझा नहीं सकते ,आप इस बात को स्वीकार कर ले की वो ऐसा ही है और आप को खुद का रवैया बदलकर उससे अलग होते है तो आप पाते है की ये बहुत मुश्किल भी नहीं था । फिर हर चीज़े पहले से बेहतर होती हुई महसूस होने लगती है । हर मुश्किल समय में आप उन चीजों को किस तरीके से सोचते है ये ज़्यादा अहम् है । जब आप उनके सकारात्मक पहलु से देखते है तो आप को उस में अपने लिए कोई भलाई मिल जाती है ।

ये ही वो जादू या सीक्रेट है जो इस विश्वास को कायम करने के बाद होता है । कुदरत का कानून काम करने लगता है । आप को वो चीज़े मुहैया करवायी जाती है जिस पर आप राज़ी हुए ।

ये कुदरत आपका इम्तेहान लेती है । जब आपने कहा हे ईश्वर मै तेरी इच्छा के अनुरूप खुद को नतमस्तक करता हु और तभी सभी चीज़े यकबयक बदल जाती है । चुकी हर हालात का कंट्रोल सिर्फ और सिर्फ खुदा के हाथो में होता है वो बस मुश्किल हालात के ज़रिये आपके विश्वास को टेस्ट कर रहा होता है । और आप एक सच्चे अनुयायी की तरह उन हालात पर शिकायत न कर उसमे भी भलाई का कोई पहलु खोज निकालते है तो उसकी दयालुता आपको अपने घेरे में ले लेती है । कुछ लोग इसे सकारात्मक सोच का जादू कहते है लेकिन सच ये नहीं है  ।

आप निर्धन है तो आप को आगे बढने के रास्ते खुद ब खुद चल के आते है । जिन रिश्तो में कड़वाहट आ चुकी होती है उन रिश्तो में नई सुबह होने लगती है । हर बिगड़ा हुआ काम बनने लगता है । जो बॉस आप से सीधे मुंह बाते नहीं करता था वो आपको नये मौके देता है । जिस बिजनेस में घाटा हो रहा होता है वो फिर से जमने लगता है । ये सब कैसे हो रहा है ? ये सब खुदा के कानून का नतीजा है जो बदला नहीं करते । इन बातो को समझने के लिए खुदा पर विश्वास करना होता है अटूट विश्वास और शुक्र ।

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